मेरी ना-काबिलियत
बदला लेने की महारत है नहीं मुझमें
लेकिन मैं काबिल हूंँ बदलने में,
वक़्त के साथ, हालात के साथ
इंसान के साथ, जज़्बात के साथ
और जिस तरह से वो हक रखते हैं मुझपे
उन सभी दावेदारों के साथ,
मैं काबिल हूंँ बदलने में |
जिंदा करने की महारत है नहीं मुझमें,
लेकिन मैं काबिल हूंँ कत्ल करने में
अफ़सोस का, अरमान का
आस का, अरदास का
और जो भी लम्हें गमगीन कर गए
हर उस बुरे अहसास का,
मैं काबिल हूं कत्ल करने में |
हालांकी,
दिल की कही लिखने की महारथ है मुझमें
लेकिन मैं काबिल नहीं हूंँ लिखने में
मेरी मौत, मेरी किस्मत
मेरी अर्जी, तेरी मर्जी
और जो मेरी-तेरी कहानी अधूरी रह गयी इश्क़ की,
मैं काबिल नहीं हूँ लिखने में |
मैं काबिल नहीं हूंँ लिखने में,
ना काबिल हूंँ लिखने में ||
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