खयाल


कशमकश हर वक्त, 
सिलसिलेवार, 
मुझे खयाल रहता है
तू दूर जितना , उतना मुश्किल तूझसे प्यार करना सा है
मैं प्यार में मगर ,प्यार तेरा ना मैं हूँ
मैं खुश़ दिखता तो सही असल में गम खाया ज्यादा हूँ

कशमकश हर वक्त, 
सिलसिलेवार, 
मुझे खयाल रहता है
कुछ पल का खेल सारा, फिर भी जाना़ तुझपे एतबार सा है
थोड़ी उम्र जो गैर साथ गुजरी वो भी थोड़ा याद सा है
सुना था प्यार मैं हूँ उसका, क्या पता था क्या इरादा
लगा मुझे हादसा है
          
कशमकश हर वक्त, 
सिलसिलेवार, 
मुझे खयाल रहता है
पा जाऊं मैं तुझे, चांद के करीब मैं
हसीन मैं अमीर मेैं, खुदा के और करीब मैं
और कर दू पूरी ये सज़ा तुम से मिल ना पाने की

कशमकश हर वक्त, 
सिलसिलेवार, 
मुझे खयाल रहता है
मुझ में मुझसे जो छुपके, बैठा मेरी मौत कहती है
मैं बन ना जाऊँ कोई और, धड़कने खौफ कहती हैं

कशमकश हर वक्त 
सिलसिलेवार, 
मुझे खयाल रहता है
मेरे दिल का चैन मुझसे 
मिलों दूर बैठा है॥ 

                                                ©someonetushar



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