मैं और मेरा मतलब
मैं बेवज़ह मुस्कुराया नहीं करता,
मेरा जी़ना भी बेवजह नहीं,मेरा रोना भी बेवज़ह नहीं|
बेवज़ह किसी से मेरा मिलना भी नहीं,
बेवज़ह किसी महफ़िल में खिलना भी नहीं,
बेवज़ह तो यूं मेरा तुम्हारे पास आना भी नहीं,
बेवज़ह तुमसे कोई भाव जताना भी नहीं|
बेवज़ह दोस्ती का हाथ बढ़ाना भी नहीं,
बेवज़ह किसी की डूबती कश्ती पार लगाना भी नहीं
बेवज़ह तो इस रचना का कोई शब्द भी नहीं,
बेवज़ह किसी तर्क पर मैं निशब्द भी नहीं|
किसी न किसी की कुछ तो वज़ह है,
वज़ह है मतलब मेरा |
मेरा मतलब तुम से मुझ तक नहीं वह तो बेवज़ह है!
मतलब मेरा मुझ से तुम तक है,
जो इस सब की वज़ह है|
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